Administrative Building

अनुसंधान विंग

       इस संस्थान का अनुसंधान विंग व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली में गुणवत्ता संवर्धन के लिए लगातार काम कर रहा है और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों को प्रासंगिक बना रहा है। कौशल विश्लेषण, पाठ्यक्रम विकास एवं पाठ्यक्रम को एनएसक्यूएफ से संरेखण करने का जो गुरुत्वपूर्ण कार्य अनुसंधान विंग को सौंपा गया है उससे हमारे देश के लोगों के लिए रोजगार सृजन के व्यापक अवसर प्राप्त होंगें।

       हाल ही में परिणाम आधारित प्रारूप में पाठ्यक्रम तैयार करने तथा समकालीन उद्योग की जरुरतों को पूरा करने कि दिशा में भी एक बड़ी पहल की गई है। अभिकल्पित/ पुनरीक्षित किए गए पाठ्यक्रमों को विभिन्न योजनाओं/ प्रणालियों में वर्गीकृत किया गया है जिसका विवरण नीचे दिया गया हैः

 

1. शिल्प प्रशिक्षण योजना (सीटीएस):

इस योजना के तहत् अभिकल्पित किए गए पाठ्यक्रम दीर्घकालिक अवधि के होते हैं और मूल रुप से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान व्यवस्था में चलाए जाते हैं।

पाठ्यचर्या - नव अभिकल्पित

  • • मृदा परीक्षण एवं फसल तकनीशियन
  • • सौर तकनीशियन
  • • तकनीशियन मेटोट्रोनिक्स
  • • स्मार्टफोन तकनीशियन सह ऐप टेस्टर
  • • आईओटी (स्मार्ट सिटी)
  • • आईओटी (स्मार्ट कृषि)
  • • आईओटी (स्मार्ट हेल्थकेयर)
  • • फायरमैन

जर्मन भारतीय व्यावसायिक शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (जीआईआईवीईटी) के अधीन नई पहल के तहत 04 (चार) अर्हताएं अभिकल्पित की गईं जिनका अनुमोदन जर्मन चैंबर्स ने किया। इन अर्हताओं का संयुक्त प्रमाणन एनसीवीटी तथा एसोशिएशन ऑफ जर्मन चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्री एण्ड कॉमर्स (डीआईएचके) द्वारा जारी किया जाएगा। ये अर्हताएँ हैः-

  • • मशीनिस्ट
  • • टूल एवं डाई मेकर (डाईज़ एण्ड माउल्ड)
  • • टूल एवं डाई मेकर (प्रेस टूल, जिग्ज एण्ड फिक्सचर)
  • • तकनीशियन मेटोट्रोनिक्स

पाठ्यचर्याओं का परिणाम आधारित प्रारूप में पुनरीक्षण

       सीटीएस योजना के अधीन आने वाले व्यवसायों को उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए उनके पाठ्यक्रमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करके उन्हें दुरस्त किया गया है। ये पाठ्यक्रम “पाठ्यचर्याएं (Syllebi)” अनुशीर्षक के तहत उपलब्ध हैं। नए प्रारुप के अनुसार अब तक 70 पाठ्यचर्याएं दुरस्त की जा चुकी हैं। बाकी बची पाठ्यचर्याओं को चरणबद्ध तरीके से दुरस्त किया जा रहा है। यद्यपि सभी सीटीएस व्यवसाय एनएसक्यूएफ प्रारुप के साथ संरेखित किए जा चुके हैं तथा एनसीवीटी एवं एनएसक्यूएफ से अनुमोदित हैं।

प्रक्रिया अधीन पाठ्यचर्याएं

  • • संयोजी विनिर्माण तकनीशियन (3डी प्रिंटिंग)
  • • इलेक्ट्रीशियन बिजली वितरण
  • • भू-सूचनाविज्ञान तकनीशियन
  • • वायुयान संरचनात्मक फिटर

2. शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एटीएस):

इस योजना के तहत अभिकल्पित किए गए पाठ्यक्रम विशेष रुप से विभिन्न उद्योगों में ‘नौकरी के साथ प्रशिक्षण’ (On-Job Training) के लिए बने हैं। अभी हाल ही में 44 एटीएस व्यवसायों को परिणाम आधारित प्रारुप के अनुसार दुरस्त किया गया है तथा 190 व्यवसायों को एनएसक्यूएफ के साथ संरेखित किया गया है।

3. शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना (सीआईटीएस):

इस योजना के अधीन आने वाले पाठ्यक्रम व्यावसायिक अनुदेशकों के लिए बने हैं जिनकी अवधि 01 वर्ष रहती है तथा विभिन्न राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) एवं प्रशिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीओटी) में चलाए जाते हैं। ये पाठ्यक्रम पुनरीक्षण प्रक्रियाधीन हैं।

4. दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीटीएस):

इस प्रणाली की परिकल्पना डीजीटी द्वारा प्रशिक्षण के दोहरे प्रारुप अर्थात् संस्थान आधारित प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित प्रशिक्षण दोनों में प्रशिक्षण देने के लिए की गई है। संस्थान उद्योग के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर सकता है तथा डीजीटी के सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से इन पाठ्यक्रमों को शुरु कर सकता है। इस प्रारुप के तहत अभी तक कुल 17 व्यवसाय अभिकल्पित किए गए हैं तथा इन व्यवसायों की पाठ्यचर्या ‘दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली’ अनुशीर्षक के अंतर्गत उपलब्ध है।

5. कौशल विकास पहल योजना (एसडीआईएस):

इस योजना के तहत आने वाले पाठ्यक्रम अल्प अवधि के होते हैं तथा ये मॉड्यूलर नियोजनीयता कौशल (एमईएस) प्रारुप में होते हैं। अनुसंधान विंग द्वारा अभिकल्पित किए गए मॉड्यूल अब प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत स्थानांतरित किए गए हैं।